पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) जम्मू-कश्मीर में 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGWs) को निर्देश दे रही है कि वे मुख्यधारा की वैध राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो जाएं। पाकिस्तान का मकसद है कि जम्मू-कश्मीर में अपने नेटवर्क को मजबूत किया जाए। इस खुलासे के सामने आने के बाद राजनीतिक गलीयारों में हलचल तेज हो गई है।
क्या है ISI का मकसद?
पाकिस्तान की ISI की तरफ से रची गई इस नई साजिश का खुलासा तब हुआ जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बीते दिनों में पकड़े गए कुछ ओवरग्राउंड वर्कर्स से पूछताछ की थी। जांच के दौरान सामने आया कि ISI अपने समर्थकों को राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रही है ताकि वे वैध राजनीतिक कार्यकर्ता की पहचान का इस्तेमाल कर सकें। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसका मकसद राजनीति की आड़ में आतंकवादी गतिविधियों को आगे बढ़ाना और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचना है। इस रणनीति का मकसद लॉजिस्टिकल ऑपरेटरों को सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बचाना और 'कॉर्डन एंड सर्च' ऑपरेशन्स के दौरान उन्हें राजनीतिक सुरक्षा मुहैया कराना है।
राजनीतिक दल भी चिंतित
पाकिस्तान की तरफ से रची गई इस नई साजिश पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल भी चिंतित हैं। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और संसद सदस्य चौधरी रमजान ने कहा- "ये एक अच्छी बात है। अगर पाकिस्तान को इस बात का एहसास हुआ कि हजारों लोगों को मार कर वो कुछ हासिल नहीं कर सका और अब मुख्यधारा में शामिल होने की बात कर रहा है तो हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।" चौधरी रमजान ने कहा पाकिस्तान ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के 3 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं को मारा है। चौधरी रमजान ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। सुरक्षा एजेंसियों को देखना चाहिए ताकि वो राहत की सांस ले सके।
ये चिंता का विषय- भाजपा नेता
भाजपा और अपनी पार्टी के नेताओं ने इसे पाकिस्तान की तरफ से रची गई एक बड़ी साजिश बताया है। भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि ये एक चिंता का और खतरनाक मुद्दा है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद पर नकेल कसी है। और अब ISI OGWs को मुख्यधारा में शामिल करके अपने नेटवर्क को मजबूत और कश्मीर में चल रहे शांति को फिर से खत्म करना चाहता है।
कश्मीरियों का इस्तेमाल किया गया- मुंतजिर मोहिउद्दीन
वहीं, अपनी पार्टी के नेता मुंतजिर मोहिउद्दीन ने कहा- "ये एक सही खबर नहीं है। बाहर की एजेंसियों ने हमेशा कश्मीरियों का इस्तेमाल किया है। आज अमन है, लोग राहत की सांस लेकर जी रहे हैं। ऐसे समय में पाकिस्तान की तरफ से ये खबर आना साफ इशारा करता है कि वो हमें जीने नहीं देंगे। हम हिंदुस्तान का एक हिस्सा है और जो साजिश शुरू हो रही है वह इस अमन को फिर से बर्बाद करना चाहते हैं।"
सुरक्षा एजेंसियां हुई एक्टिव
इन सब के बीच सुरक्षा एजेंसियां अब उन आतंकी गुटों के नामों के फिर से सामने आने पर बारीकी से नजर रख रही हैं, जिन्होंने 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती, खूनी दौर को परिभाषित किया था। इनमें अल-उमर मुजाहिदीन, अल-बद्र और तहरीक-उल-मुजाहिदीन शामिल हैं।
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